'रवैया सुधारो', 100% टैरिफ बिल पास होते ही अमेरिका की खुली धमकी, भारत-चीन को अमेरिकी सीनेटर ने दिया अल्टीमेटम

Updated on 17-09-2026 11:46 AM
वॉशिंगटन: अमेरिकी संसद ने भारी बहुमत से 'रूस बैन बिल' (Lindsey O. Graham Sanctions Act) पारित कर दिया है। इस बिल के पास होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक का कड़ा टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार दे दिया गया है। बिल पास होते ही डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा 'अपना रवैया सुधारें और तेल कहीं और से खरीदें। तुष्टिकरण कोई रणनीति नहीं है!'

इस नए अमेरिकी कानून से नई दिल्ली और बीजिंग पर रूसी ऊर्जा आयात रोकने का दबाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है जिससे वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी सीनेटर ने आगे पुतिन से कहा 'हमें आपकी असलियत पता है। रूस की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। आपका वार मशीन खतरे में है। चीन और भारत, आपके लिए बेहतर है कि आप अपना रवैया सुधारें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।' उन्होंने आगे यूक्रेन के साथ खड़े होने के लिए अमेरिका के लोगों को धन्यवाद कहा है।

ट्रंप के बिल के समर्थन में 58 डेमोक्रेटिक सांसद आए

आपको बता दें कि यह बिल पहले सीनेट में 86:11 वोटों से पास हो गया था लेकिन राष्ट्रपति के आर्थिक अधिकारों को बढ़ाने पर असहमति के कारण हाउस में अटक गया था। हालांकि 58 डेमोक्रेट्स ने अपनी पार्टी से अलग होकर डोनाल्ड ट्रंप का साथ दे दिया। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व ने बिल में टैरिफ से जुड़े प्रावधानों का कड़ा विरोध किया है।

'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक हाउस में माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ़रीज़ ने कहा कि टैरिफ में व्यापक छूट और नियमों को लागू करने में कमियों के कारण इन अधिकारों का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे मॉस्को के खिलाफ नियमों का पक्का पालन सुनिश्चित नहीं हो पाता। वहीं सांसद रिचर्ड नील ने अपने भाषण में कहा 'हम इस राष्ट्रपति को टैरिफ से जुड़े और अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।'

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल में क्या प्रावधान हैं?

  • रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला ये बिल यूक्रेन के समर्थन में उठाया गया बड़ा कदम है। इसका मकसद मॉस्को की ऊर्जा से होने वाली कमाई में रुकावट डालना और नियमों को लागू करने में मौजूद कमियों को दूर करना है।
  • यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े विदेशी खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें।
  • यह बिल उन जहाजों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और समुद्री ऑपरेटरों पर खास प्रतिबंध लगाता है जिनका इस्तेमाल मार्केट कैप से कम कीमत पर रूसी तेल ले जाने के लिए किया जाता है।
  • इसमें रूस के बड़े नेताओं, सरकारी अधिकारियों, बैंकों और एनर्जी सेक्टर की कंपनियों को सजा देने का प्रावधान भी है।
  • हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला यह बिल सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट के टकराव पर असर नहीं डालता लेकिन यह ईरान के मिलिट्री और एनर्जी व्यापार के खिलाफ मौजूदा लागू करने के तरीकों को और असरदार बनाता है।

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