लंबी अवधि के निवेश के लिए कौन सा म्यूचुअल फंड मुफीद है, विशेषज्ञ से समझिए

Updated on 17-09-2026 12:12 PM
UTI AMC के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इक्विटी विशाल चोपड़ा बताते हैं कि मिडकैप कंपनियों को उभरते हुए खिलाड़ियों की तरह समझ सकते हैं। स्मॉलकैप कंपनियों की तुलना में मिडकैप कंपनियां ज्यादा स्थापित और मजबूत होती हैं, जबकि लार्जकैप कंपनियों के मुकाबले उनमें आगे बढ़ने की ज्यादा संभावना रहती है। यही वजह है कि इनमें निवेश करने वालों को उन कंपनियों की शुरुआती यात्रा का हिस्सा बनने का मौका मिल सकता है, जो आगे चलकर बाजार की बड़ी कंपनियां बन सकती हैं।
मिडकैप से मतलब देश में काम कर रहीं मंझोले दर्जे की कंपनियों से है। ये ऐसी कंपनियां हैं जो शुरुआती मुश्किल दौर से निकल चुकी होती हैं। उनका कारोबार का तरीका काफी हद तक साबित हो चुका होता है और वे एक अच्छा आकार भी हासिल कर चुकी होती हैं। फिर भी उनके पास आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश रहती है। इसलिए आने वाले दौर में इन शेयरों में अक्सर अच्छी तेजी दिखाई देती है।

मिडकैप शेयरों का रिटर्न कैसा?

पिछले कुछ वर्षों में देखें तो मिडकैप शेयरों ने अच्छा रिटर्न दिया है। इसका असर उन शेयर की कीमतों पर भी पड़ा है और उनका मूल्यांकन यानी वैल्यूएशन काफी बढ़ गया है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि मिडकैप कंपनियां अच्छी हैं या नहीं, बल्कि यह है कि उनकी भविष्य की कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद उनकी मौजूदा कीमतों में पहले ही शामिल हो चुकी है। मिडकैप शेयरों का मौजूदा वैल्यूएशन उनके लंबे समय के औसत से काफी ऊपर है। इसकी एक वजह यह है कि लार्जकैप कंपनियों की तुलना में मिडकैप कंपनियों की कमाई तेजी से बढ़ी है और आगे भी बेहतर बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऐसे में निवेशकों के लिए सुरक्षा का मार्जिन पहले की तुलना में कम हुआ है। लेकिन सिर्फ वैल्यूएशन देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। आखिरकार शेयर की कीमत को सही ठहराने वाली सबसे अहम चीज कंपनी की कमाई है।

मिडकैप कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल

इस समय भारत में घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती मिडकैप कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल बना रही है। कारोबार के ज्यादा संगठित होने, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग, देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने और लोगों के वित्तीय सेवाओं से ज्यादा जुड़ने जैसे बदलावों से इन कंपनियों के लिए नए अवसर बन रहे हैं। दरअसल, अभी कई मिडकैप कंपनियों का कारोबार अपेक्षाकृत छोटा है। इसलिए सफल कंपनियां अपनी कमाई को बड़ी और पहले से स्थापित कंपनियों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ा सकती हैं। इस तरह लंबे समय में मजबूत कमाई आज के ऊंचे वैल्यूएशन के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है।
यहां सवाल उठता है कि क्या मिडकैप शेयर सस्ते हैं? तो इसका जवाब नहीं हैं। लेकिन, सिर्फ शेयर का दाम महंगा होना उन्हें खराब निवेश नहीं बनाता। अगर कंपनी की कमाई उस कीमत के हिसाब से तेजी से बढ़ती है, जो निवेशक शेयर खरीदने के लिए चुका रहा है, तो निवेश आकर्षक बना रह सकता है। यही वजह है कि अब सही शेयर का चुनाव पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। मजबूत कारोबार और बेहतर प्रतिस्पर्धी क्षमता वाली कंपनियों के अलावा ऐसी कंपनियों में भी मौके हो सकते हैं, जो बदलाव के दौर से गुजर रही हैं या जिनके मुनाफे में सुधार की उम्मीद है। अलग-अलग तरह की कंपनियों में निवेश का संतुलन पोर्टफोलियो को बाजार के उतार-चढ़ाव में संभालने में मदद कर सकता है।
मिडकैप कंपनियों को केवल बड़ी कंपनियों का छोटा रूप मानना सही नहीं होगा। इस क्षेत्र में औद्योगिक उत्पादन, इलेक्ट्रिकल उपकरण, ऑटो पार्ट्स, स्वास्थ्य सेवाएं, उपभोक्ता सामान, वित्तीय सेवाएं, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म, लॉजिस्टिक्स, होटल और खास तरह के मैन्युफैक्चरिंग कारोबार जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। कई कंपनियों ने अपने खास बाजार में मजबूत जगह बनाई है और अर्थव्यवस्था में हो रहे लंबे समय के बदलावों का उन्हें फायदा मिल रहा है। इनमें से कुछ कारोबार बढ़ने के साथ भविष्य में लार्जकैप कंपनियों की श्रेणी में पहुंच सकती हैं। हालांकि, जब वैल्यूएशन ऊंचा हो तो हाल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले शेयरों के पीछे भागने के बजाय कंपनी के कारोबार की गुणवत्ता, नकदी कमाने की क्षमता, कमाई की स्थिरता और शेयर की कीमत पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
मिडकैप शेयरों में रिटर्न ज्यादा है तो इसके दाम में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा है। जून 2011 से जून 2026 के बीच निफ्टी मिडकैप 150 टीआरआई ने पांच साल की रोलिंग अवधि में औसतन 18.40% का रिटर्न दिया। इसी दौरान निफ्टी 100 टीआरआई का औसत रिटर्न 13.40%और निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई का 16.02% रहा। मिडकैप के पांच साल के रिटर्न में उतार-चढ़ाव का स्तर 6.73% रहा, जबकि लार्जकैप में यह 3.68% और स्मॉलकैप में 8.85% था। यानी मिडकैप में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा जोखिम रहा। लेकिन इसमें स्मॉलकैप की तुलना में उतार-चढ़ाव कम रहा। रिटर्न और जोखिम के संतुलन को देखें तो मिडकैप का अनुपात 2.73 गुना, लार्जकैप का 3.64 गुनाऔर स्मॉलकैप का 1.81 गुना रहा है।
आपने देख लिया कि मिडकैप ने लार्जकैप और स्मॉलकैप के बीच एक दिलचस्प जगह बनाई है। इनमें पांच साल की अवधि में अच्छा रिटर्न पाने की संभावना रही है और स्मॉलकैप के मुकाबले जोखिम भी कम रहा है। इसलिए मिडकैप को छोटी अवधि में तेजी से पैसा बनाने के बजाय लंबे समय में संपत्ति बनाने वाले निवेश के रूप में देखना बेहतर है। इसलिए निवेशकों को अब निवेश का तरीका भी बदलना होगा। मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए आगे मिडकैप से मिलने वाला रिटर्न केवल शेयरों की कीमत बढ़ने पर निर्भर नहीं रहेगा। कंपनियों की कमाई कितनी तेजी से और लगातार बढ़ती है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। इसलिए निवेशकों को हाल के शानदार रिटर्न से प्रभावित होकर जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय अनुशासित तरीका अपनाना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों में निवेश फैलाने के साथ एसआईपी के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद कर सकता है।

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