दोस्त ने छोड़ा साथ, फिर भी नहीं मानी हार, चांदी पर लगाया दांव और खड़ी कर दी 4900 करोड़ रुपये की कंपनी

Updated on 17-09-2026 12:31 PM
नई दिल्ली: भारत में ज्वेलरी को सिर्फ निवेश के बजाय रोजमर्रा की फैशन एक्सेसरी के तौर पर देखने का आइडिया लेकर इशेंद्र अग्रवाल ने 2019 में ज्वेलरी कारोबार में कदम रखा। महज 10 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से शुरू हुई GIVA आज करीब 4925 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनी बन चुकी है। हालांकि, इस सफर की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी।

दोस्त ने छोड़ दिया था साथ

इशेंद्र अग्रवाल ने जनवरी 2019 में एक दोस्त के साथ ज्वेलरी बिजनेस शुरू करने का फैसला किया था। बाद में निजी कारणों से दोस्त इस योजना से अलग हो गया, लेकिन इशेंद्र ने अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला किया।
अप्रैल 2019 में उनकी मुलाकात निकिता प्रसाद और सचिन शेट्टी से हुई। इसके बाद मई में जीवा की वेबसाइट लॉन्च की गई। संस्थापकों को उम्मीद थी कि वेबसाइट शुरू होते ही ग्राहक आने लगेंगे, लेकिन पहले तीन महीनों में कंपनी को रोजाना सिर्फ एक-दो ऑर्डर मिल रहे थे। इशेंद्र ने एक इंटरव्यू में शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि टीम हर जगह लोगों से खरीदारी करने के लिए कह रही थी और ग्राहकों को समझाने की कोशिश कर रही थी।

एक दिन में मिले 250 ऑर्डर

GIVA को एक गिफ्टिंग पोर्टल पर लिस्ट किए जाने के बाद तस्वीर तेजी से बदली। कंपनी के रोजाना ऑर्डर करीब एक से बढ़कर एक दिन में लगभग 250 तक पहुंच गए। अचानक ऑर्डर बढ़ने से संस्थापकों को दिन-रात पैकेज तैयार करने पड़े और कंपनी का स्टॉक भी जल्द खत्म हो गया। यह उस समय हुआ जब भारत के ऑनलाइन फाइन ज्वेलरी बाजार में CaratLane, Bluestone और Melorra जैसे स्थापित ब्रांड पहले से मौजूद थे।

महंगे सोने के बजाय चुनी चांदी

GIVA के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि भारतीय ग्राहक ऑनलाइन महंगी ज्वेलरी खरीदने में कितना भरोसा दिखाएंगे। कंपनी के मुताबिक, सोने की कीमत अधिक होने के कारण ऑनलाइन हाई-टिकट ज्वेलरी बेचना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से GIVA ने सिल्वर ज्वेलरी को अपना प्रमुख प्रोडक्ट बनाया। कंपनी ने इसे प्रीमियम लुक के साथ अपेक्षाकृत किफायती विकल्प के तौर पर पेश किया।

ऑनलाइन ज्वेलरी में भरोसा जीतना बड़ी चुनौती

ऑनलाइन ज्वेलरी खरीदने में ग्राहकों का भरोसा हासिल करना भी आसान नहीं था। इसके लिए GIVA ने अपने सिल्वर प्रोडक्ट्स के साथ ऑथेंटिसिटी सर्टिफिकेट, लाइफटाइम री-प्लेटिंग और 30 दिन की रिटर्न पॉलिसी जैसी सुविधाएं शुरू कीं। धीरे-धीरे कंपनी ने ऑनलाइन कारोबार को बढ़ाया और फिर ऑफलाइन स्टोर्स की तरफ कदम बढ़ाया।

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